जहां सस्ता तेल मिलेगा, वहीं से लेंगे!” भारत का अमेरिका को करारा जवाब

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

भारत ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए वह किसी एक देश के दबाव में नहीं आएगा। रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिका की आलोचना के बीच भारत के रूस में राजदूत विनय कुमार ने कहा कि भारत वहीं से तेल खरीदेगा जहां से उसे “सबसे अच्छा सौदा मिलेगा।”

“हमारा उद्देश्य 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है,” — विनय कुमार, भारतीय राजदूत, रूस

अमेरिकी टैरिफ़ की आलोचना, भारत की स्पष्ट नीति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ़, और उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान कि भारत पर दबाव डालकर रूस को अलग-थलग किया जाए, के जवाब में भारत ने साफ शब्दों में अपनी रणनीति दोहराई

राजदूत विनय कुमार ने रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ को दिए इंटरव्यू में कहा:

  • भारत अपने राष्ट्रीय हित में निर्णय लेगा

  • भारत-रूस के बीच रुपये-रूबल में भुगतान की व्यवस्था काम कर रही है

  • अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं

“अनुचित, अव्यावहारिक और ग़ैर-ज़रूरी”: भारत का अमेरिका को जवाब

विनय कुमार ने अमेरिकी टैरिफ़ को “अनुचित, अव्यावहारिक और ग़ैर-ज़रूरी” करार दिया। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा:

“अगर आपको भारत से तेल खरीदने में दिक्कत है तो मत खरीदिए। कोई मजबूर नहीं कर रहा।”

भारत-रूस में भुगतान को लेकर कोई समस्या नहीं

हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि भारतीय बैंकों में रूसी निर्यातकों के अरबों रुपये अटके हुए हैं, लेकिन विनय कुमार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि तेल भुगतान व्यवस्था सामान्य है।

अमेरिका में भी उठी भारत के समर्थन में आवाज़ें

भारत पर ट्रंप के टैरिफ़ के खिलाफ अमेरिका में भी आलोचना हो रही है:

निकी हेली (रिपब्लिकन नेता):

“चीन से निपटने के लिए अमेरिका को भारत जैसे मित्र की जरूरत है।”

जॉन केरी (पूर्व विदेश मंत्री):

“ट्रंप की धमकी भरी नीति सहयोगियों को दूर कर रही है।”

जॉन बोल्टन (पूर्व NSA):

“चीन भी रूस से तेल खरीद रहा है, उस पर कोई टैरिफ़ नहीं? ट्रंप की नीति भारत को रूस और चीन के करीब कर सकती है।”

तेल व्यापार सिर्फ कूटनीति नहीं, ऊर्जा सुरक्षा है

भारत का कहना है कि:

  • वह तेल की सोर्सिंग बाजार के आधार पर करता रहेगा

  • ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है

  • भारत किसी एक ध्रुवीय दबाव में नहीं आएगा

भारत की स्थिति स्पष्ट है — वह जियोपॉलिटिक्स नहीं, बल्कि नेशनल इकोनॉमिक इंटरेस्ट के आधार पर अपने फैसले लेता रहेगा। अमेरिकी दबाव या टैरिफ़ भारत की नीति को नहीं बदल सकते।

रेलगाड़ी से रफ्तार पाएगा गुजरात! पीएम मोदी की ₹1400 Cr की बंपर सौगात

Related posts

Leave a Comment